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हाइकू-रामायण

 अयोध्या राज।
चक्रवर्ती राजन|
 वृद्धह्वैजाएं।  
 कौशल-राज, 
सुतविहीनहाय!
भए उदास॥
तपस्या कीनी,    

मिलेवरदान,

हों पुत्रवान।

बीते नौ मास , 
कौशल्या के गर्भात,
प्रकटे राम।
माता सुमात्रा, 
लछमन सा भ्राता,
जनमा साथ॥
जने युगल,
कैकई महारानी,
भरत-शत्रुघ्न॥
चंचल-नैन,
बांकी भृकुटी बैन,
छवि निहाल।
छन-पैंजनि,  
रुम -झुम बाजनि,
चलत-चाल॥
धावत राम,
 भाजैं पाछे मईया, 
मचै ता थै या॥
युगल जोड़ी,
करें क्रीड़ा हो-होड़ी,
 खेल-हंसोड़ी॥
गुरु बुलाए,
अवसर मिलाए,
संग पठाए।
धनुष-बाण,
चौदह कला ज्ञान,
गुरु की कृपा॥
                   ज़ारी…

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