हाइकू-रामायण
Posted May 13th, 2008 - 23:28
in
अयोध्या राज।
चक्रवर्ती राजन|
वृद्धह्वैजाएं।
कौशल-राज,
सुतविहीनहाय!
भए उदास॥
तपस्या कीनी,
मिलेवरदान,
हों पुत्रवान।
बीते नौ मास ,
कौशल्या के गर्भात,
प्रकटे राम।
माता सुमात्रा,
लछमन सा भ्राता,
जनमा साथ॥
जने युगल,
कैकई महारानी,
भरत-शत्रुघ्न॥
चंचल-नैन,
बांकी भृकुटी बैन,
छवि निहाल।
छन-पैंजनि,
रुम -झुम बाजनि,
चलत-चाल॥
धावत राम,
भाजैं पाछे मईया,
मचै ता थै या॥
युगल जोड़ी,
करें क्रीड़ा हो-होड़ी,
खेल-हंसोड़ी॥
गुरु बुलाए,
अवसर मिलाए,
संग पठाए।
धनुष-बाण,
चौदह कला ज्ञान,
गुरु की कृपा॥
ज़ारी…
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