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देश- विदेश

मुझे बहुत से e mail मिलते हे, टिपण्णीयो मे दोस्त लोग कहते हे,आप जर्मनी के बारे कुछ लिखो, अच्छाई, बुराई कुछ भी आप ने जो वहा देखा सुना, मे भी बहुत सोचता हु लिखु , लेकिन क्या ? सब जानकारी तो आज कल गूगल महांराज पर मिल जाती हे,फ़िर कई बार पुछा जाता हे कि वहा पर हम लोगो से केसा व्यावहार किया जाता हे ? कया हमे नफ़रत से देखा जाता हे ?क्या हमे सडक पर आते जाते फ़ब्तिया कसी जाती हे, क्या हमे दबाया जाता हे, कया हम से ज्यादा काम ओर कम पेसे दिये जाते हे ???, ऎसे बहुत से सवाल यार लोग करते हे, यहां पर भी काफ़ी लोगो ने सीधे नही लेकिन यही बात थोडी ढग से पुछी.तो आज सोचा मे यह सब बाते आप सब को बताने की कोशिश करु.पहले यहां के लोगो के बारे मे.... यह लोग भी हमारी तरह से ही हे, सुख दुख, सास बहु के झगडे, भाई बहिन सब कुछ हमारी तरह से ही हे, कुछ लोग भगवान को मानते हे कुछ नही भी, कुछ बहुत ही अन्ध विश्वासी भी होते हे,लेकिन यह थोडे सुलझे हुये लोग हे, यहां भी सभी को आजादी हे, लेकिन यह लोग अपनी आजादी को समझते हे, लेकिन उस की सीमा को भी समझते हे, मेने आज तक यहां किसी को लडते झगडते नही देखा, कभी किसी को गाली गलोच करते नही देखा, ओर जो गालिया इन की होती हे वह हम भारतियो की नजर मे कुछ भी नही,यहां हेरा फ़ेरी का काम मेने नही देखा, झुठ बोलना इन के साथ हम भी भुल गये, चोरिया बडे शहरो मे कभी कभार हो जाती हे, हम घर खुला छोड कर जा सकते हे, आप का समान खो जाये, पर्स, जेवर, गेहने ओर कोई सी भी कीमती चीज आप ६०% उम्मीद रख सकते हे आप को वापिस मिल जाये, गन्दगी कोई नही डालता, अगर किसी ने भी गन्द डाला ओर दुसरे ने देख लिया तो आप को टोक सकता हे, तालाक यहां पर ६५% तक हे , पहले तो आज के नोजवान ५०% शादी ही नही करते,( जब उन्हे दुध पकेट मे मिल जाता हे तो गाय क्यो बाधें ) यह मेरा नही यहां के नोजवानो का विचार हे, बाकी जो ५०% बचे उन मे से आधे बच्चे नही करते, पता नही कब वीवी भाग जाये.यहां प्यार भी मोसम की तरह से हे,आज इस से शाम को किसी ओर से,इसीलिये यहां के लोग अब शादियां विदेशी लडकियो से करते हें.यहां पर ओरत को पुरी आजादी हे बल्कि यु कहा जाये की मर्दॊ से ज्यादा हक हे, फ़िर भी यह अकेली ? यहाँ जवानी मे मां वाप को बच्चे के वास्ते समय नही होता ओर बडे होने पर बच्चे के पास मां वाप के लिये समय नही होता, शायद इसी लिये यहां मदर डे, फ़ादर डे मनाये जाते हे,लेकिन इन सब के अलावा यहां भी अच्छे संस्कार वाले परिवार मिलते हे, घरेलु पत्निया भी मिलती हे , वफ़ा दार पति, ओर मां वाप की सेवा करने वाले बच्चे भी मिलते हे.यहां कोई भी भुखे पॆट नही सोता भिखारी हे लेकिन उन्हे भी खाना मिलता हे, छत मिलती हे,यहां पर रिश्वत नाम को कोई नही जानता, दफ़्तरो मे कोई भी चपरासी नही, काम का यह हाल हे की किसी भी दफ़तर मे आप को मेज पर कोई भी फ़ाईल नजर नही आये गी, अगर आप यहां D C के दफ़तर भी गये तो वह खुद दरवाजा खोल कर आप से हाथ मिलाये गा फ़िर आप को बेठने के लिये कुर्सी दे गा, ओर आप के बेठने के बाद बेठे गा,आप का काम दिनो महीनो मे नही कुछ ही समय मे हो जाये गा, वरना आप केश कर सकते हे,यहां कोई भी खाने पीने की वस्तु मे कोई मिलावट नही होती, भारत से जो समान आता हे, जेसे चाय की पत्ती उस का स्वाद ही अलग होता हे, मेने जिन्दगी मे शायद बिना मिलावट का समान यही खाया हो,ओर अगर किसी खाने से आप बिमार हो जाते हे, ओर आप को यकिन हे तो आप सब खर्चा उस से हर्जाने के रुप मे वसुल सकते हे, मिलावट करने वाले को हमेशा के लिये काली लिस्ट मे डाल दिया जाता हे,विदेशियो के साथ कोई अलग से व्यवहार नही किया जाता,उन्हे भी एक समान समझा जाता हे, ओर काम भी वेसे ही करवाया जाता हे जेसे यहां के देशी से,किसी विदेशी को रगं भेद की टिपण्णी करने पर जुर्माना (५०,००० € ) हो सकता हे, पुलिस सच मे पब्लिक की दोस्त हे,पडोसी को पडोसी नही जानता, सब अपने मे मस्त हे, लोग जिन्दगी को जिन्दगी की तरह से जीते हे, इन लोगो मे दिखावा बिलकुल नही, अपनी मात्र भुमि, ओर मात्र भाषा से प्यार करने वाले हे, छोटा बडा कोई नही, समय के पाबंद हे, जबान के पक्के, अगर कही इन्सान जिन्दा हे तो यहां (यहा कुछ अपवाद भी हे) उन्हे छोड कर,सफ़ाई यहा बचपन मे ही बच्चो को सिखाई जाती हे.हमारे यहां मोसम ज्यादा तर ठण्डा ही रहता हे, हरयाली चारो ओर हे, यहां की पेदा होने वाली चीजे बहुत कम हे लेकिन दुनिया की हर चीज यहा मिलती हे, सभी तरह फ़ल, सब्जिया. दाले. चाय, काफ़ी यानि आप को जो चाहिये हाजिर हे.फ़िर कभी कुछ याद आया या आप मे से किसी ने यहां के बारे कुछ पुछना हो तो जरुर पुछे

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