
बिना सोच-विचार कर लिए गए निर्णयों की श्रृंखला का नतीजा यह है कि कई दशकों की मेहनत से स्थापित की गई शांति के हिंसा और अव्यवस्था में बदल जाने का खतरा पैदा हो गया है.
देश में कभी भी किसी धार्मिक स्थल को वनभूमि नहीं दी गई है और न ही कहीं मंदिरों के ट्रस्टों या दरगाहों के प्रबंधन बोर्डों का राज मंदिर या दरगाहों की सीमाओं के बाहर चलने दिया गया हैSource : IndianBytes.com For More Stories Go To IndianBytes.com
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