हम मॉंझी हुए फटी नाव के प्रेमशंकर मिश्र धूप के हुए न हुए झांव के हम मॉंझी हुए फटी नाव के। चलना फिरना हंसना बोलना किस्त किस्त क़रजो की वापसी इनकी उनकी पीली नीली बातें ऑंच चढ़े उड़ जाती भाप सी ऐसे में कैस Read Original story
हम मॉंझी हुए फटी नाव के प्रेमशंकर मिश्र धूप के हुए न हुए झांव के हम मॉंझी हुए फटी नाव के। चलना फिरना हंसना बोलना किस्त किस्त क़रजो की वापसी इनकी उनकी पीली नीली बातें ऑंच चढ़े उड़ जाती भाप सी ऐसे में कैस Read Original story
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