ब्लागिंग करते करते एक साल हो गया .....सोच रहा हूं कि बढ़िया टाइम-पास है...जो भी मन में है लिख कर हल्कापन महसूस होने लगता है। पहले अखबारों के लिये लिखा करता था लेकिन जब से नेट पर लिखना शुरू किया पता नहीं कभी भी अखबार में कभी भी कोई लेख भेजा ही नहीं ——पता है इस का क्या कारण है ?—-न ही टका वहां मिलता था और न ही यहां मिलता है , लेकिन यहां यह संतुष्टि है कि हम लोग अपनी मर्जी के मालिक हैं —-जो चाहा, लिख लिया, और बंदा खुश।अखबारों के लिये पहले लेख लिखो—-फिर फैक्स करो, उस के बाद दो-तीन बार फोन कर के कंफर्म करो कि ठीक तरह से रिसीव हो गया है कि नहीं—- यह सब बहुत किया —-कईं साल किया —-खीझ खीझ कर किया —-लेकिन इस के इलावा अपनी बात जनमानस तक पहुंचाने का कोई रास्ता ... [Follow Original Article link for full content.]
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