एक डाल पर बैठा पंछी पंखों को खुजलाएआसमान में उड़ने को जैसे ललचाए ....की-बोर्ड का मन भी मस्ती से लगा मचलनेजड़ सी उंगलियाँ मेरी तेज़ी से लगीं थिरकने ....मेरा चिट्ठा जैसे अभी कल ही जन्मा थाआज एक साल और दस दिन का भी हो गया........घुटनों के बल चलता बालक जैसे रूठे, फिर ठिठकेवैसे ही खड़ा रहा थामे वक्त को .....एक कदम भी आगे न बढ़ाबसअपने जैसे नन्हे बालक को देखता रहामुग्ध होता रहा ......मोहित तो मैं भी थी उस नन्हे बालक परजो आया था ईरान से .....तीन साल का नन्हा आर्यान हिन्दी से प्यार करताहाथ जोड़कर नमस्ते कहता तो सब मंत्रमुग्ध हो जाते......बड़ा बेटा वरुण भी उन्हीं दिनों इंजिनियर की डिग्री लायाछोटे बेटे विद्युत ने अपने मनपसन्द कॉलेज में प्रवेश पाया ....अर्दलान जो नन्हे आर्यान का बड़ा भाई , उसे भी नई दिशा मिलीगीत गाते गाते अपने देश से दूर विदेश में पढ़ने की सोची.....बच्चों के उज्ज्वल भविष्य में व्यस्त माता-पितापल भर भी न रुकते , बस चलते ही जाते जीवन पथ परएक सितम्बर आई तो दोनों हम साथी इक पल को रुके .....जीवन पथ पर जीवन साथी बन कर बाईस साल चले हमचलते चलते कब और कैसे इक दूजे के सच्चे दोस्त बने हम .....और जीने का मकसद पाया, रोते रोते हँसने का हुनर भी आया .......एक साल का नन्हा सा चिट्ठा भी मुस्कायाछोटे छोटे पग भरता मेरी बाँहों में दौड़ा आया .....
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