समय की यही पुकार बसन्ती चोला रंग डालो.....समय की यही पुकार.... बसन्ती चोला रंग डालोसुनो हे दुनियावालो. यह त्याग तितिक्षा का रंग है .समय की यही पुकार.... बसन्ती चोला रंग डालोइस रंग को पहिन झूला फांसी पर.. वीर भगतसिहइस चोले का रंग कभी खूब खिला था ...झाँसी में ऊँचे पद वालो... न भूलो त्याग और बलिदान कोसमय की यही पुकार.... बसन्ती चोला रंग डालो भाभाशाह ने अपनाया था.... इस बसंती रंग को सबसे अदभुत रंग लाया था.. नरसिह का चोला रे बढे द्रव्य की शोभा है इस रंग के चोले से धनवालोसमय की यही पुकार.... बसन्ती चोला रंग डालो.जिसने दिल से अपनाया परमहंस के इस चोले कोजिसने संस्कृति के झंडे को नभ तक फहरायासमय की यही पुकार बसन्ती चोला रंग डालोसंकुचित मन हुए हमारे ,हम बन बैठे अनुदार दिशा बदलकर लेकिन अब तो बढो लगनवालोसमय की यही पुकार बसन्ती चोला रंग डालो.हरिश्चन्द्र ने इसे पहिनकर कभी न छोडा साथ सत्य का आजादी पर मानवीय गरिमा न भुलाओ भटके मनवालो.आजादी के इस महान पर्व पर आप सभी को हार्दिक ढेरो बधाई और शुभकामना महेंद्र मिश्रा, जबलपुर.एम.पी.
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