हालांकि किसी की सोच पर हमारा कोई जोर नहीं है लेकिन यहां सबसे पहले यह स्पष्ट कर देना चाहती हूं कि चोखरेबाली ब्लॉग भले ही महिलाओं का है किंतु यह किन्हीं भी कूंठाओं से ग्रसित नहीं है । यहां सिर्फ स्त्री ही नहीं पुरुष भी आकर अपने विचार रखते हैं । शायद वंदना मिश्रा जी ने रिपोर्ट को गहरआईसे पढा़ नहीं हैं या फिर वह खुद रूढिवादिता से बाहर नहीं निकल पाई है । जबकि यहां बात समाज में व्याप्त कुरीतियों ,अव्यवस्था, बुराईयों तथा महिलाओं के उअत्पीड़न के खिलाफ समाज में बदलाव लाने की है ।हम सब जानते हैं कि विवाह एक ऎसी प्रणाली है जिसके बगैर हम समाज की संरचना की कल्पना भी नहीं कर सकते । आज मैं अपनी बेटी को हर वो चीज देने का प्रयास करती हूं जिसकी उसे जरूरत है । आज मईं अपने बेटे व बेटी की परवरिश में कतई फर्क नहीं ... [Follow Original Article link for full content.]
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